MP Board 11वीं हिंदी: आरोह और वितान के 3 अंक के बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न (उत्तर सहित)
हर पाठ के 3 अंक वाले प्रश्न उत्तर सहित, और अंत में सभी लेखकों/कवियों का परिचय (जो हमेशा 3 अंक का आता है)। हर प्रश्न के साथ लिखा है कि वह किस साल पूछा जा चुका है।
पहले ये बात पढ़ लीजिए
2022 से 2026 के पाँचों वार्षिक पेपर देखकर वे प्रश्न चुने गए हैं जो बार-बार लौटकर आते हैं, और साथ में वे भी जो हर पाठ की रीढ़ हैं। उत्तर उतने ही लंबे हैं जितने परीक्षा में लिखने होते हैं.- 📌 पूछा का मतलब है कि वही प्रश्न (या उसका बहुत करीबी रूप) उस साल के पेपर में आया था।
- ⭐ संभावित का मतलब है कि पाँच सालों में अभी तक नहीं आया, पर पाठ का महत्वपूर्ण बिंदु है।
पेपर का पैटर्न (शब्द सीमा)
| प्रश्न | अंक | शब्द सीमा |
|---|---|---|
| प्र. 16 से 19 | 3 अंक | लगभग 75 शब्द |
इस पोस्ट में क्या-क्या है (पाठ पर क्लिक करें)
किसी पाठ पर क्लिक करते ही उसके प्रश्न खुल जाएँगे। वहाँ से पिछला और अगला पाठ भी चुन सकते हैं।
नमक का दारोगा (प्रेमचंद)
पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के कौन-से दो पहलू (पक्ष) उभरकर आते हैं?
“नमक का दारोगा” कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उनका आधार स्पष्ट कीजिए।
2. “ईमानदारी की जीत”: तमाम दबावों के बाद भी वंशीधर की ईमानदारी का सम्मान होता है और अलोपीदीन उन्हें ऊँचा पद देता है।
मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती)
बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
“तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है” यहाँ लेखक ने “तालीम” शब्द दो बार क्यों प्रयोग किया है?
अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय)
“पथेर पांचाली” फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?
“अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से ‘कंटिन्युइटी’ नदारद हो जाती”, इस कथन के पीछे क्या भाव है?
“भूलो” की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?
फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनके गुज़र जाने के बाद बाकी दृश्य कैसे फ़िल्माए गए?
बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान कैसे हुआ?
विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)
कर्ज़न को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा?
गलता लोहा (शेखर जोशी)
मास्टर त्रिलोक सिंह के किस कथन को लेखक ने “ज़बान के चाबुक” कहा है और क्यों?
मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय क्यों कहा है?
रजनी (मन्नू भंडारी)
रजनी धारावाहिक की इस कड़ी की मुख्य समस्या क्या है?
“गलती करने वाला तो है ही गुनहगार, पर उसे बर्दाश्त करने वाला भी कम गुनहगार नहीं होता” इस संवाद के संदर्भ में आप सबसे ज़्यादा किसे गुनहगार मानते हैं?
स्त्री के चरित्र की बनी-बनाई धारणा से रजनी का चेहरा किन मायनों में अलग है?
जामुन का पेड़ (कृश्नचंदर)
दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात कैसे पता चली और इसका फ़ाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा?
इस पाठ में सरकार के किन-किन विभागों की चर्चा की गई है और उनके कार्य के बारे में क्या अंदाज़ा मिलता है?
भारत माता (जवाहरलाल नेहरू)
आज़ादी से पूर्व किसानों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?
दुनिया के बारे में किसानों को बताना नेहरू जी के लिए क्यों आसान था?
कबीर (पद)
कबीर ने ईश्वर के एक होने के समर्थन में क्या तर्क दिए हैं?
मीरा (पद)
“दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी। दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी” का भाव-शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)
पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?
कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर बताइए कि कवि अपनी किस स्थिति को परिजनों से छिपाना चाहता है?
चंपा काले-काले अच्छर नहीं चीन्हती (त्रिलोचन)
कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
ग़ज़ल (दुष्यंत कुमार)
ग़ज़ल के आखिरी शेर में “गुलमोहर” का क्या आशय है?
पहले शेर में “चिराग” शब्द एक बार बहुवचन में और दूसरी बार एकवचन में आया है। इसका क्या महत्व है?
ग़ज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़ें। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?
दुष्यंत की ग़ज़ल का चौथा शेर पढ़िए और बताइए कि ग़ालिब के शेर “हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है” से वह कैसे जुड़ता है?
अक्कमहादेवी (वचन)
“ओ चराचर! मत चूक अवसर” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
ईश्वर के लिए किस दृष्टांत का प्रयोग किया गया है? ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए।
क्या अक्कमहादेवी को “कन्नड़ की मीरा” कहा जा सकता है? चर्चा कीजिए।
सबसे खतरनाक (पाश)
“सबसे खतरनाक” शब्द के बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या असर पैदा हुआ?
कवि ने कई बातों को “बुरा है” न कहकर “बुरा तो है” कहा है। “तो” के प्रयोग से कथन की भंगिमा में क्या बदलाव आया?
कवि ने मेहनत की लूट, पुलिस की मार और गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक क्यों नहीं माना?
“सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है, आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो, आपकी निगाह में रुकी होती है” में “घड़ी” शब्द की व्यंजना बताइए।
आओ, मिलकर बचाएँ (निर्मला पुतुल)
दिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आवश्यकता पर क्यों बल दिया गया है?
यह कविता आदिवासी समाज की किन बुराइयों की ओर संकेत करती है?
“इस दौर में भी बचाने को बहुत कुछ बचा है” से क्या आशय है?
भारतीय गायिकाओं में बेजोड़: लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व)
लेखक ने “गानपन” का उल्लेख किया है। इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है?
“लता ने करुण रस के गानों के साथ न्याय नहीं किया है, जबकि शृंगारपरक गाने वे बड़ी उत्कटता से गाती हैं”, इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र)
पालरपानी, पातालपानी और रेजाणीपानी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
राजस्थान में “कुईं” किसे कहते हैं? यह कुएँ से कैसे भिन्न है?
आलो-आँधारि (बेबी हालदार)
घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताएँ और उन्हें होने वाली समस्याएँ बताइए।
“तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो”, जेठू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
भारतीय कलाएँ
कला और भाषा के अंतर्संबंध पर आपकी क्या राय है?
भारतीय संगीत की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
लेखक / कवि परिचय (3 अंक)
लिखने का तरीका
परीक्षा में परिचय हमेशा तीन बिंदुओं पर पूछा जाता है: (1) दो रचनाएँ, (2) भावपक्ष-कलापक्ष या भाषा-शैली, (3) साहित्य में स्थान। जन्म-मृत्यु की तारीख़ भूमिका में लिख दें।प्रेमचंद 📌 2022 में पूछा📌 2023 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: मूल नाम धनपत राय; जन्म 1880, लमही (उ.प्र.); मृत्यु 1936। रचनाएँ: गोदान, गबन, निर्मला, रंगभूमि (उपन्यास); मानसरोवर (कहानी संग्रह)।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: हिंदुस्तानी (हिंदी-उर्दू मिश्रित) भाषा, मुहावरों और लोकोक्तियों का सटीक प्रयोग, यथार्थ और आदर्श का मेल।
साहित्य में स्थान: कथा-साहित्य के शिखर पुरुष; कहानी-उपन्यास को कल्पना और रूमानियत से निकालकर यथार्थ की ज़मीन पर प्रतिष्ठित किया।
कृष्णा सोबती 📌 2024 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 18 फ़रवरी 1925, गुजरात (अब पाकिस्तान); मृत्यु 25 जनवरी 2019। रचनाएँ: ज़िंदगीनामा, दिलो-दानिश, मित्रो मरजानी, हम-हशमत, शब्दों के आलोक में।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: संस्कृतनिष्ठ तत्समता, उर्दू का बाँकपन और पंजाबी की ज़िंदादिली का मेल; संयमित और साफ़-सुथरी रचनाशीलता।
साहित्य में स्थान: हिंदी कथा साहित्य में विशिष्ट स्थान; मित्रो, शाहनी, हशमत जैसे यादगार चरित्र।
सत्यजित राय 📌 2023 में पूछा📌 2026 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1921, कोलकाता; मृत्यु 1992। फ़िल्में: पथेर पांचाली, अपराजितो, अपू का संसार, शतरंज के खिलाड़ी; रचनाएँ: प्रो. शंकु के कारनामे, सोने का किला, बादशाही अँगूठी।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा: सहज, तत्सम-तद्भव-क्षेत्रीय सभी शब्दों का स्वाभाविक मेल; शैली: संस्मरणात्मक और बेबाक।
साहित्य में स्थान: भारतीय सिनेमा को कलात्मक ऊँचाई देने वाले फ़िल्मकार; ऑस्कर और भारतरत्न सहित कई सम्मान।
बालमुकुंद गुप्त 📌 2025 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1865, गुड़ियानी (रोहतक, हरियाणा); मृत्यु 1907। रचनाएँ: शिवशंभु के चिट्ठे, चिट्ठे और खत, खेल तमाशा।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: खड़ी बोली, व्यंग्य-विनोद का पुट, निर्भीकता; शब्दों के अद्भुत पारखी (अनस्थिरता शब्द पर महावीर प्रसाद द्विवेदी से बहस)।
साहित्य में स्थान: भारतेंदु-युग और द्विवेदी-युग के बीच की कड़ी; राष्ट्रीय नवजागरण के सक्रिय पत्रकार।
शेखर जोशी 📌 2024 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1932, अल्मोड़ा; मृत्यु 2022। रचनाएँ: कोसी का घटवार, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, एक पेड़ की याद।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: निहायत सहज और आडंबरहीन भाषा, सामाजिक यथार्थ के बारीक नुक्तों की पकड़।
साहित्य में स्थान: नई कहानी आंदोलन के प्रगतिशील पक्ष के प्रतिनिधि; मेहनतकश और सुविधाहीन तबके की कहानियाँ।
मन्नू भंडारी 📌 2022 में पूछा📌 2026 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1931, भानपुरा (म.प्र.); मृत्यु 2021। रचनाएँ: एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, आपका बंटी, महाभोज, स्वामी; पटकथाएँ: रजनी, निर्मला।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: आत्मीय अंदाज़, आक्रोश, व्यंग्य और संवेदना का मनोवैज्ञानिक आधार, सहज बोलचाल।
साहित्य में स्थान: नई कहानी आंदोलन की प्रमुख लेखिका; हिंदी अकादमी दिल्ली का शिखर सम्मान।
कृश्नचंदर (कृष्ण चंदर) 📌 2025 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1914, वज़ीराबाद (पंजाब); मृत्यु 1977। रचनाएँ: एक गधे की आत्मकथा, शिकस्त, ग़द्दार, अन्नदाता, पेशावर एक्सप्रेस।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: व्यंग्य, करुणा और यथार्थ का मेल; उर्दू के कथाकार होने के कारण भाषा में रवानी।
साहित्य में स्थान: प्रेमचंद के बाद कहानी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले कथाकार; प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े।
जवाहरलाल नेहरू ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1889, इलाहाबाद; मृत्यु 1964। रचनाएँ: मेरी कहानी, विश्व इतिहास की झलक, हिंदुस्तान की कहानी, पिता के पत्र पुत्री के नाम।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: सरल, प्रवाहमयी, प्रभावशाली; विचारों और भावों की स्पष्ट अभिव्यक्ति।
साहित्य में स्थान: स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री; राजनेता के साथ उच्च कोटि के लेखक।
कबीर 📌 2022 में पूछा📌 2026 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म सन् 1398, लहरतारा (वाराणसी के पास)। मृत्यु 1518, मगहर। रचनाएँ: बीजक (साखी, सबद, रमैनी)।
भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: निर्गुण भक्ति, एक ईश्वर, जाति-धर्म के भेद और कर्मकांड का विरोध, प्रेम और समानता का समर्थन। कलापक्ष: सधुक्कड़ी भाषा, साखी-सबद-रमैनी शैली, उलटबाँसियाँ, सरल प्रतीक।
साहित्य में स्थान: निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के प्रतिनिधि कवि। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें “वाणी का डिक्टेटर” कहा।
मीराबाई 📌 2023 में पूछा📌 2024 में पूछा📌 2025 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म सन् 1498, कुड़की गाँव (मारवाड़); मृत्यु 1546। रचनाएँ: मीरा पदावली, नरसीजी-रो-माहेरो।
भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: कृष्ण के प्रति माधुर्य भाव की भक्ति, विरह की वेदना और मिलन का उल्लास। कलापक्ष: राजस्थानी भाषा में ब्रज का प्रभाव, मुक्तक गेय पद, सरलता और संगीतात्मकता।
साहित्य में स्थान: सगुण धारा की महत्वपूर्ण कवयित्री। लोकलाज और कुल की मर्यादा के विरोध के कारण स्त्री-मुक्ति की आवाज़ भी बनीं।
भवानी प्रसाद मिश्र ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1913, टिगरिया (होशंगाबाद, म.प्र.); मृत्यु 1985। रचनाएँ: सतपुड़ा के जंगल, गीतफ़रोश, चकित है दुख, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाव-कला: सहज लय की कविता, बोलचाल के गद्यात्मक वाक्य-विन्यास को कविता में ढालना, गांधीवादी विचारधारा।
साहित्य में स्थान: “कविता का गांधी” कहे जाते हैं; साहित्य अकादमी और पद्मश्री से सम्मानित।
त्रिलोचन 📌 2023 में पूछा📌 2024 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: मूल नाम वासुदेव सिंह; जन्म 1917, चिरानी पट्टी, सुल्तानपुर (उ.प्र.); मृत्यु 2007। रचनाएँ: धरती, गुलाब और बुलबुल, दिगंत, ताप के ताए हुए दिन, शब्द।
भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: जीवन में निहित मंद लय, गाँव की ज़मीन से जुड़ाव, श्रमिकों के जीवन का यथार्थ। कलापक्ष: छायावादी रूमानियत से मुक्त भाषा, बोलचाल की चुटीली-नाटकीय भाषा, हिंदी में सॉनेट को स्थापित किया।
साहित्य में स्थान: प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि; साहित्य अकादमी सहित कई सम्मान।
दुष्यंत कुमार 📌 2025 में पूछा📌 2026 में पूछा
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1933, राजपुर नवादा (उ.प्र.); मृत्यु 1975। रचनाएँ: सूर्य का स्वागत, आवाज़ों के घेरे, साये में धूप, एक कंठ विषपायी (गीतिनाट्य)।
भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: व्यवस्था के प्रति आक्रोश, बदलाव की तलाश, आम आदमी की पीड़ा। कलापक्ष: उर्दू-हिंदी मिश्रित सरल भाषा, ग़ज़ल विधा का हिंदी में प्रयोग।
साहित्य में स्थान: हिंदी ग़ज़ल को प्रतिष्ठित करने का श्रेय। उनके कई शेर लोकोक्तियों की तरह दोहराए जाते हैं।
अक्कमहादेवी ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 12वीं सदी, उडुतरी (शिवमोगा, कर्नाटक)। रचनाएँ: हिंदी में “वचन सौरभ”; अंग्रेज़ी में “स्पीकिंग ऑफ़ शिवा” (ए.के. रामानुजन)।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाव: वीरशैव आंदोलन की कवयित्री; चन्नमल्लिकार्जुन देव (शिव) की भक्ति, लोकलाज और भौतिक बंधनों का त्याग।
साहित्य में स्थान: स्त्री-मुक्ति और क्रांतिकारी चेतना की पहली सृजनात्मक आवाज़; बसवन्ना और अल्लामा प्रभु की समकालीन।
पाश ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: मूल नाम अवतार सिंह संधू; जन्म 1950, तलवंडी सलेम (जालंधर, पंजाब); मृत्यु 1988। रचनाएँ: लौह कथा, उड़ दे बाजां मगर, साडे समियां बिच (पंजाबी); बीच का रास्ता नहीं होता (हिंदी अनुवाद)।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाव-कला: विद्रोही कविता का नया सौंदर्य, तीखा पर सृजनात्मक तेवर, लोक संस्कृति का गहरा बोध।
साहित्य में स्थान: समकालीन पंजाबी साहित्य के महत्वपूर्ण कवि; खालिस्तानियों द्वारा मारे गए।
निर्मला पुतुल ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1972, दुमका (झारखंड)। रचनाएँ: नगाड़े की तरह बजते शब्द, अपने घर की तलाश में।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाव-कला: आदिवासी समाज की विसंगतियाँ, संथाली समाज के सकारात्मक-नकारात्मक पहलू, सरल और स्पष्ट भाषा।
साहित्य में स्थान: आदिवासी जीवन की अनछुई पहलुओं को सामने लाने वाली कवयित्री।
कुमार गंधर्व ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1924, सुलेभावि, बेलगाँव (कर्नाटक); मृत्यु 1992। मूल नाम शिवपुत्र सिद्धरामैया कोमकली; 10 वर्ष की उम्र में पहली मंचीय प्रस्तुति।
भाषा-शैली / भाव-कला: विशेषता: मालवा की लोकधुनों और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सुंदर सामंजस्य; कबीर के पदों का अद्भुत गायन।
साहित्य में स्थान: कालिदास सम्मान और पद्मविभूषण से सम्मानित।
अनुपम मिश्र ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1948, वर्धा (महाराष्ट्र); मृत्यु 2016। रचनाएँ: आज भी खरे हैं तालाब, राजस्थान की रजत बूँदें।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: सरल, प्रवाहमयी, लोक-शब्दों से भरपूर; शोधपरक शैली।
साहित्य में स्थान: पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में लोकप्रिय; 1977 से गांधी शांति प्रतिष्ठान के पर्यावरण कक्ष से संबद्ध।
बेबी हालदार ⭐ संभावित
जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म सन् 1974 (अनुमानित), जम्मू-कश्मीर। रचना: आलो-आँधारि (बांग्ला में लिखी, हिंदी में अनूदित)।
भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: सहज आत्मकथात्मक, बिना बनावट के जीवन-संघर्ष की ईमानदार अभिव्यक्ति।
साहित्य में स्थान: घरेलू नौकरानी के रूप में कार्यरत रहते हुए लेखिका बनीं; उनकी आत्मकथा बहुत चर्चित रही।
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