Aroh cc Class 11 Hindi MP BOARD Vitan

MP Board 11th Hindi 3 Marker Important Questions 2026-27: आरोह वितान 3 अंकीय प्रश्न उत्तर (पिछले वर्ष के प्रश्नों सहित)

October 24, 2026
MP Board • कक्षा 11वीं • हिंदी

MP Board 11वीं हिंदी: आरोह और वितान के 3 अंक के बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न (उत्तर सहित)

हर पाठ के 3 अंक वाले प्रश्न उत्तर सहित, और अंत में सभी लेखकों/कवियों का परिचय (जो हमेशा 3 अंक का आता है)। हर प्रश्न के साथ लिखा है कि वह किस साल पूछा जा चुका है।

सत्र 2026-27 • अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026 • स्रोत: NCERT आरोह भाग 1 व वितान भाग 1 और MP Board 2022-2026 के प्रश्न पत्र

पहले ये बात पढ़ लीजिए

2022 से 2026 के पाँचों वार्षिक पेपर देखकर वे प्रश्न चुने गए हैं जो बार-बार लौटकर आते हैं, और साथ में वे भी जो हर पाठ की रीढ़ हैं। उत्तर उतने ही लंबे हैं जितने परीक्षा में लिखने होते हैं.
  • 📌 पूछा का मतलब है कि वही प्रश्न (या उसका बहुत करीबी रूप) उस साल के पेपर में आया था।
  • ⭐ संभावित का मतलब है कि पाँच सालों में अभी तक नहीं आया, पर पाठ का महत्वपूर्ण बिंदु है।

पेपर का पैटर्न (शब्द सीमा)

प्रश्नअंकशब्द सीमा
प्र. 16 से 193 अंकलगभग 75 शब्द
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

नमक का दारोगा (प्रेमचंद)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के कौन-से दो पहलू (पक्ष) उभरकर आते हैं?

उत्तर: पहला पक्ष नकारात्मक है। अलोपीदीन धन के बल पर कानून खरीदने वाला, चालाक और भ्रष्ट व्यापारी है जो नमक की तस्करी करता है और दारोगा को घूस देने की कोशिश करता है। दूसरा पक्ष सकारात्मक है। वह ईमानदारी का सम्मान करना जानता है, इसलिए अंत में वंशीधर की सत्यनिष्ठा पर मुग्ध होकर उन्हें अपनी जायदाद का स्थायी मैनेजर बना देता है।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

“नमक का दारोगा” कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उनका आधार स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 1. “धर्म और धन का युद्ध”: कहानी में न्याय के मैदान में धर्म (ईमानदारी) और धन (अलोपीदीन) की लड़ाई दिखाई गई है, जिसमें अंत में धर्म जीतता है।
2. “ईमानदारी की जीत”: तमाम दबावों के बाद भी वंशीधर की ईमानदारी का सम्मान होता है और अलोपीदीन उन्हें ऊँचा पद देता है।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?

उत्तर: लेखिका बार-बार बादशाह का नाम और समय जानना चाहती थीं। मियाँ को यह बाल की खाल निकालना लगा। उन्हें यह भी लगा कि बात उनके हुनर से हटकर इतिहास की ओर जा रही है, जिसमें उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी। इसलिए वे रुखाई से बात टालने लगे।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

“तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है” यहाँ लेखक ने “तालीम” शब्द दो बार क्यों प्रयोग किया है?

उत्तर: पहली “तालीम” का अर्थ है स्कूली पढ़ाई और दूसरी का अर्थ है सीखने का तरीका या उसकी अहमियत। मियाँ का भाव है कि किताबी पढ़ाई से बड़ी चीज़ करके सीखना है। दूसरी बार “सीख” या “शिक्षण” शब्द रखा जा सकता है।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

“पथेर पांचाली” फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?

उत्तर: पैसों की कमी के कारण। राय के पास हर समय पैसे नहीं होते थे, इसलिए पैसे इकट्ठे होने पर ही शूटिंग हो पाती और फिर कई महीनों के लिए रुक जाती। इसके अलावा काशफूल, बारिश और बदलते मौसम जैसी स्थितियों का इंतज़ार भी करना पड़ा। इस वजह से शूटिंग बीच-बीच में टूटती रही और पूरी होने में ढाई साल लग गए।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

“अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से ‘कंटिन्युइटी’ नदारद हो जाती”, इस कथन के पीछे क्या भाव है?

उत्तर: काशफूलों वाले मैदान में अपू-दुर्गा के रेलगाड़ी देखने का आधा दृश्य शूट हो चुका था। सात दिन बाद जानवर सारे काशफूल खा गए थे। अब बचा हुआ दृश्य शूट करते तो पहले आधे दृश्य (सफ़ेद फूलों भरे मैदान) से उसका मेल नहीं बैठता। इसीलिए बाकी दृश्य अगले साल शरद ऋतु में, जब फिर फूल खिले, तब शूट किया गया। भाव यह है कि फ़िल्म में निरंतरता बहुत ज़रूरी होती है।
प्र. 33 अंक⭐ संभावित

“भूलो” की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?

उत्तर: छह महीने बाद जब टीम बचा हुआ दृश्य शूट करने गाँव पहुँची तो पता चला कि “भूलो” कुत्ता मर चुका है। गाँव में ही भूलो जैसा दिखने वाला दूसरा कुत्ता मिल गया, जिसका रंग बादामी और दुम का सिरा सफ़ेद था। उसी ने वह दृश्य पूरा किया जिसमें सर्वजया थाली का बचा भात गमले में डालती है और भूलो उसे खाता है।
प्र. 43 अंक⭐ संभावित

फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनके गुज़र जाने के बाद बाकी दृश्य कैसे फ़िल्माए गए?

उत्तर: श्रीनिवास घूमते मिठाईवाले की भूमिका में थे, जिसके पीछे अपू और दुर्गा मिठाई देखने के लिए दौड़ते हैं। शूटिंग रुकने के दौरान उन सज्जन का देहांत हो गया। बाद में जो दूसरे सज्जन मिले उनका चेहरा तो पहले जैसा नहीं था, पर शरीर मिलता-जुलता था। इसलिए उन्हें कैमरे की ओर पीठ करके दिखाया गया। दर्शकों को यह बदलाव पता ही नहीं चला।
प्र. 53 अंक⭐ संभावित

बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान कैसे हुआ?

उत्तर: पैसे न होने के कारण बरसात के मौसम में शूटिंग नहीं हो सकी। जब पैसे आए तब अक्टूबर आ चुका था, यानी शरद ऋतु, जब आमतौर पर बारिश नहीं होती। राय हर दिन कलाकारों और कैमरे के साथ देहात में बैठे इंतज़ार करते रहे। आखिर एक दिन अचानक बादल छाए और मूसलाधार बारिश हुई। उसी बारिश में दृश्य शूट हुआ और बाद में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए दूध में थोड़ी ब्रांडी मिलाकर दी गई।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

विदाई-संभाषण (बालमुकुंद गुप्त)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

कर्ज़न को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा?

उत्तर: कर्ज़न काउंसिल में अपनी पसंद का अंग्रेज़ सदस्य नियुक्त कराना चाहता था, पर इस मुद्दे पर उसकी बात नहीं मानी गई। उसे देश और विदेश दोनों जगह नीचा देखना पड़ा। क्षुब्ध होकर उसने इस्तीफ़ा दे दिया और इंग्लैंड लौट गया।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

गलता लोहा (शेखर जोशी)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

मास्टर त्रिलोक सिंह के किस कथन को लेखक ने “ज़बान के चाबुक” कहा है और क्यों?

उत्तर: जब धनराम तेरह का पहाड़ा याद न कर पाया तो त्रिलोक सिंह ने कहा, “तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?” इसे लेखक ने ज़बान का चाबुक इसलिए कहा क्योंकि यह कथन बेंत की मार से ज़्यादा चोट करने वाला था। इसने धनराम के मन में हीनता बैठा दी और उसे जाति-आधारित पेशे तक सीमित कर दिया।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय क्यों कहा है?

उत्तर: क्योंकि गाँव में मेधावी विद्यार्थी रहा मोहन आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ गया तो वहाँ रिश्तेदार के घर घरेलू नौकर जैसे काम में लगा दिया गया। उसकी पढ़ाई दब गई और संभावनाओं की जगह संघर्ष शुरू हो गया। यह पूरा बदलाव उसके पहले के जीवन से बिलकुल अलग था, इसलिए इसे नया अध्याय कहा गया है।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

रजनी (मन्नू भंडारी)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

रजनी धारावाहिक की इस कड़ी की मुख्य समस्या क्या है?

उत्तर: मुख्य समस्या शिक्षा के व्यवसाय बनने की है। गणित के अध्यापक मिस्टर पाठक ट्यूशन लेने वाले बच्चों को ज़्यादा नंबर देते हैं और न लेने वालों के नंबर काट देते हैं। अमित ने पूरा पेपर ठीक किया था, फिर भी उसे कम नंबर मिले क्योंकि वह ट्यूशन नहीं पढ़ता था। रजनी इस अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाती है।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

“गलती करने वाला तो है ही गुनहगार, पर उसे बर्दाश्त करने वाला भी कम गुनहगार नहीं होता” इस संवाद के संदर्भ में आप सबसे ज़्यादा किसे गुनहगार मानते हैं?

उत्तर: मेरे विचार में सबसे बड़े गुनहगार वे अध्यापक हैं जो ट्यूशन के लालच में बच्चों के साथ अन्याय करते हैं। पर उनके साथ वे अभिभावक भी दोषी हैं जो डर के मारे सब कुछ चुपचाप सह लेते हैं, जैसे लीला। रजनी के अनुसार चुप रहना भी अन्याय को बढ़ावा देता है।
प्र. 33 अंक⭐ संभावित

स्त्री के चरित्र की बनी-बनाई धारणा से रजनी का चेहरा किन मायनों में अलग है?

उत्तर: आम धारणा में स्त्री दब्बू, घर तक सीमित और अन्याय सहने वाली मानी जाती है। रजनी इसके उलट निडर, जागरूक और न्यायप्रिय है। वह स्कूल जाकर हेडमास्टर से कॉपी माँगती है, सवाल पूछती है और समाज की समस्या के लिए लड़ती है।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

जामुन का पेड़ (कृश्नचंदर)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात कैसे पता चली और इसका फ़ाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: माली ने जब दबे आदमी को आश्वासन दिया तो उसने ग़ालिब के शेर की पंक्ति कह दी, जिससे पता चला कि वह शायर है। यह बात पूरे सेक्रेटेरियट और शहर में फैल गई। फिर सब-कमेटी ने तय किया कि चूँकि दबा आदमी कवि है, इसलिए फ़ाइल का संबंध कल्चरल डिपार्टमेंट से है। इससे फ़ाइल एक और विभाग में घूमने लगी और समस्या हल होने की बजाय और लटक गई।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

इस पाठ में सरकार के किन-किन विभागों की चर्चा की गई है और उनके कार्य के बारे में क्या अंदाज़ा मिलता है?

उत्तर: कृषि विभाग, हॉर्टीकल्चर (उद्यान) विभाग, कल्चरल डिपार्टमेंट, साहित्य अकादमी, फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट, विदेश विभाग और प्रधानमंत्री कार्यालय का ज़िक्र है। इनसे अंदाज़ा मिलता है कि हर विभाग अपना दायरा बताकर मामले को दूसरे के पास भेज देता है, कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता। इस तरह लालफ़ीताशाही और सरकारी विवेकहीनता पर व्यंग्य किया गया है।
भाग 1 · आरोह गद्य खंड

भारत माता (जवाहरलाल नेहरू)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

आज़ादी से पूर्व किसानों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?

उत्तर: किसान गरीबी और कर्ज़ से दबे थे। उन्हें पूँजीपतियों, ज़मींदारों और महाजनों के शिकंजे, कड़े लगान और सूद तथा पुलिस के ज़ुल्म सहने पड़ते थे। ये सब उस विदेशी सरकार के ढर्रे से जुड़ा था जिससे छुटकारा पाना सबका लक्ष्य था।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

दुनिया के बारे में किसानों को बताना नेहरू जी के लिए क्यों आसान था?

उत्तर: हमारे पुराने महाकाव्यों और पुराणों की कथाओं ने लोगों को देश की कल्पना पहले ही करा दी थी। हर जगह कुछ लोग मिल जाते थे जिन्होंने बड़े तीर्थों की यात्रा की थी या विदेशों में नौकरी करने वाले पुराने सिपाही थे। 1930 के बाद की आर्थिक मंदी से भी दूसरे मुल्कों की बातें उनकी समझ में आने लगी थीं।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

कबीर (पद)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

कबीर ने ईश्वर के एक होने के समर्थन में क्या तर्क दिए हैं?

उत्तर: कबीर कहते हैं कि सबके लिए पवन एक है, पानी एक है और ज्योति भी एक ही है। सब बर्तन एक ही मिट्टी से गढ़े गए हैं और उन्हें गढ़ने वाला कुम्हार भी एक है। जब सृष्टि की बनावट एक है तो उसका रचयिता भी एक ही होगा। जो दो ईश्वर (हिंदू-मुसलमान का अलग-अलग) मानते हैं, उन्हें कबीर नरक का भागी बताते हैं।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

मीरा (पद)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

“दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी। दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी” का भाव-शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: मीरा ने दही मथने की घरेलू क्रिया को भक्ति से जोड़ा है। दही मथकर घी निकाल लिया और छाछ फेंक दी। ठीक इसी तरह मीरा ने जीवन का सार यानी भक्ति ले ली और निस्सार संसार को छोड़ दिया। यह दृष्टांत अलंकार का सुंदर उदाहरण है और रोज़ के जीवन से लिया गया है, इसलिए सरल और असरदार लगता है।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

घर की याद (भवानी प्रसाद मिश्र)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?

उत्तर: पिता बुढ़ापे में भी दौड़ने और खिलखिलाने वाले जीवट के हैं। वे मौत के आगे नहीं हिचकते और शेर के आगे नहीं बिचकते। उनकी वाणी में बादल की गरज है और काम में आँधी जैसी तेज़ी। साथ ही वे बच्चों से बहुत प्यार करने वाले और धैर्य देने वाले हैं।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर बताइए कि कवि अपनी किस स्थिति को परिजनों से छिपाना चाहता है?

उत्तर: कवि अपनी उदासी, बेचैनी और जेल की विवशता को छिपाना चाहता है। वह संदेश देता है कि मैं मस्त हूँ, मेरा वज़न सत्तर सेर है, खूब खाता और खेलता हूँ। वह चाहता है कि परिजन उसके लिए चिंता और शोक न करें।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

चंपा काले-काले अच्छर नहीं चीन्हती (त्रिलोचन)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?

उत्तर: चंपा अच्छी, चंचल और नटखट है। वह कभी-कभी ऊधम करती है और कवि की कलम चुरा लेती है। वह मेहनती है क्योंकि चौपायों को चराने जाती है। उसमें जिज्ञासा भी है, तभी वह कवि के पढ़ने पर चुपचाप सुनती है और अचरज करती है कि काले चिह्नों से स्वर कैसे निकलते हैं। साथ ही वह भोली और स्वाभिमानी है।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

ग़ज़ल (दुष्यंत कुमार)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

ग़ज़ल के आखिरी शेर में “गुलमोहर” का क्या आशय है?

उत्तर: गुलमोहर यहाँ सिर्फ़ एक फूलदार पेड़ नहीं, एक प्रतीक है। वह सुख-शांति, आदर्श और अपनेपन का प्रतीक है। कवि कहता है कि जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले, यानी अपने समाज में सम्मान के साथ, और मरें तो दूसरों की गलियों में भी गुलमोहर के लिए, यानी किसी आदर्श के लिए।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

पहले शेर में “चिराग” शब्द एक बार बहुवचन में और दूसरी बार एकवचन में आया है। इसका क्या महत्व है?

उत्तर: “चिरागाँ” (बहुवचन) का अर्थ है हर घर में ढेर सारी रोशनी का वादा। “चिराग” (एकवचन) का अर्थ है पूरे शहर को एक चिराग भी नसीब नहीं। इस विरोध से वादे और हकीकत के बीच की दूरी साफ़ दिखती है। यह व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य है।
प्र. 33 अंक⭐ संभावित

ग़ज़ल के तीसरे शेर को गौर से पढ़ें। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है?

उत्तर: शेर है: “न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे, ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।” इशारा उन गरीब और शोषित लोगों की ओर है जिनके पास पहनने को कपड़े तक नहीं, फिर भी वे सब कुछ सह लेते हैं। शासक वर्ग ऐसे सहनशील लोगों को अपने लिए सुविधाजनक मानता है।
प्र. 43 अंक⭐ संभावित

दुष्यंत की ग़ज़ल का चौथा शेर पढ़िए और बताइए कि ग़ालिब के शेर “हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है” से वह कैसे जुड़ता है?

उत्तर: चौथा शेर है “खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख़्वाब सही, कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए।” दोनों शेरों में हक़ीक़त को जानते हुए भी एक सुंदर ख़याल/सपने का सहारा लिया गया है। ग़ालिब जन्नत को ख़याल मानकर दिल बहलाते हैं और दुष्यंत ईश्वर न सही, आदमी के ख़्वाब को ही जीने का सहारा मानते हैं।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

अक्कमहादेवी (वचन)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

“ओ चराचर! मत चूक अवसर” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: चराचर यानी जड़ और चेतन, अर्थात पूरा संसार। अक्का कहती हैं कि मैं चन्नमल्लिकार्जुन का संदेश लेकर आई हूँ, इसलिए हे संसार के प्राणियो, यह अवसर मत गँवाओ। ईश्वर तक पहुँचने का मौका बार-बार नहीं मिलता। भूख, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या जैसी बाधाओं को वश में करके लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

ईश्वर के लिए किस दृष्टांत का प्रयोग किया गया है? ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए।

उत्तर: दूसरे वचन में ईश्वर को “जूही के फूल जैसा” कहा गया है। साम्य का आधार है कोमलता, सुंदरता और सुगंध। जैसे जूही का फूल शांत और निर्मल होता है, वैसे ही ईश्वर भी अत्यंत कोमल और करुणामय है, इसलिए भक्त उससे अपनापन महसूस करता है।
प्र. 33 अंक⭐ संभावित

क्या अक्कमहादेवी को “कन्नड़ की मीरा” कहा जा सकता है? चर्चा कीजिए।

उत्तर: हाँ, कहा जा सकता है। दोनों ने ईश्वर को पति माना, दोनों ने राज-परिवार और लोक-लाज के बंधन छोड़े, और दोनों की कविता में समर्पण है। अंतर यह है कि अक्का के वचनों में वैराग्य और अहंकार-त्याग प्रमुख है, जबकि मीरा में प्रेम और विरह की पीड़ा अधिक है।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

सबसे खतरनाक (पाश)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

“सबसे खतरनाक” शब्द के बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या असर पैदा हुआ?

उत्तर: बार-बार दोहराव से कविता में लय और बल आ गया है। हर बार एक नई स्थिति जुड़ती है, जिससे पाठक के मन में खतरे का एहसास और गहरा होता जाता है। इससे कवि की चिंता और आक्रोश प्रभावशाली ढंग से सामने आते हैं।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

कवि ने कई बातों को “बुरा है” न कहकर “बुरा तो है” कहा है। “तो” के प्रयोग से कथन की भंगिमा में क्या बदलाव आया?

उत्तर: “तो” लगाने से वाक्य में स्वीकार और तुलना का भाव आ जाता है। कवि मानता है कि ये बातें बुरी ज़रूर हैं, पर इनसे भी बड़ा खतरा कोई और है। इससे आगे कही जाने वाली बात का महत्व बढ़ जाता है।
प्र. 33 अंक⭐ संभावित

कवि ने मेहनत की लूट, पुलिस की मार और गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक क्यों नहीं माना?

उत्तर: ये बुराइयाँ बाहरी हैं और इनका विरोध किया जा सकता है। इनसे लड़ने की चेतना जीवित रहती है। कवि के अनुसार सबसे खतरनाक वह स्थिति है जब हम इन्हें सहने के आदी हो जाएँ और हमारे भीतर विरोध और सपने ही मर जाएँ।
प्र. 43 अंक⭐ संभावित

“सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है, आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो, आपकी निगाह में रुकी होती है” में “घड़ी” शब्द की व्यंजना बताइए।

उत्तर: घड़ी यहाँ समय और प्रगति का प्रतीक है। घड़ी कलाई पर चल रही है, पर व्यक्ति की सोच ठहरी हुई है। यानी समय बदल रहा है, पर हम अपनी स्थिति बदलने की कोशिश नहीं कर रहे। यह ठहराव और निष्क्रियता सबसे बड़ा खतरा है।
भाग 2 · आरोह काव्य खंड

आओ, मिलकर बचाएँ (निर्मला पुतुल)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

दिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आवश्यकता पर क्यों बल दिया गया है?

उत्तर: अकेला भोलापन शोषण का शिकार बन सकता है। अक्खड़पन आत्मसम्मान की रक्षा करता है और जुझारूपन संघर्ष की ताकत देता है। संकट के इस दौर में आदिवासी समाज को अपना अस्तित्व बचाने के लिए सरलता के साथ संघर्ष की क्षमता भी चाहिए।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

यह कविता आदिवासी समाज की किन बुराइयों की ओर संकेत करती है?

उत्तर: कविता अशिक्षा, कुरीतियों और शराब की ओर बढ़ते झुकाव की ओर संकेत करती है। कवयित्री इसे समाज की कमज़ोरी मानती हैं और चाहती हैं कि अच्छाइयों के साथ-साथ इन बुराइयों से भी सावधान रहा जाए।
प्र. 33 अंक⭐ संभावित

“इस दौर में भी बचाने को बहुत कुछ बचा है” से क्या आशय है?

उत्तर: अविश्वास और विनाश के इस समय में भी बहुत कुछ हमारे पास सुरक्षित है, जैसे जंगल की ताज़ा हवा, नदियों की निर्मलता, पहाड़ों का मौन, गीतों की धुन, मिट्टी की सोंधी गंध और फ़सलों की लहलहाहट। कवयित्री आशा जगाती हैं कि सब खत्म नहीं हुआ, मिलकर कोशिश करें तो बचाया जा सकता है।
भाग 3 · वितान

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़: लता मंगेशकर (कुमार गंधर्व)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

लेखक ने “गानपन” का उल्लेख किया है। इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है?

उत्तर: “गानपन” गाने की वह मिठास है जो आम आदमी को भी भावविभोर कर दे। इसे पाने के लिए केवल शास्त्र-शुद्ध ज्ञान काफ़ी नहीं है। सुरों की निर्मलता, लय की पकड़, शब्दों का भाव और श्रोता तक पहुँचाने की कला का अभ्यास भी चाहिए। रोज़ सुर-साधना के साथ भावपूर्ण गायन का रियाज़ करना होगा।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

“लता ने करुण रस के गानों के साथ न्याय नहीं किया है, जबकि शृंगारपरक गाने वे बड़ी उत्कटता से गाती हैं”, इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर: यह लेखक का अपना मत है। उनके अनुसार करुण रस के साथ लता ने उतना न्याय नहीं किया, जबकि मुग्ध शृंगार वाले मध्य या द्रुत लय के गाने उन्होंने बड़ी उत्कटता से गाए। विद्यार्थी अपनी राय दे सकते हैं। साथ ही लेखक यह भी मानते हैं कि इसमें संगीत निर्देशकों का दोष भी है, जिन्होंने लता की निर्मल आवाज़ का पूरा उपयोग नहीं किया।
भाग 3 · वितान

राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

पालरपानी, पातालपानी और रेजाणीपानी में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पालरपानी वह पानी है जो सीधे बरसात से मिलता है और धरातल पर बहता है। पातालपानी वह भूजल है जो कुओं से निकाला जाता है। रेजाणीपानी इन दोनों के बीच का रूप है। यह धरातल से नीचे उतर चुका है, पर खड़िया पट्टी के कारण पाताल के पानी में नहीं मिल पाया। राजस्थान में वर्षा को भी रेजा से नापा जाता है, यानी वह वर्षा जो ज़मीन के भीतर समाई हो।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

राजस्थान में “कुईं” किसे कहते हैं? यह कुएँ से कैसे भिन्न है?

उत्तर: कुईं यानी बहुत छोटा-सा कुआँ। कुआँ पुल्लिंग है और कुईं स्त्रीलिंग। कुईं का व्यास या घेरा बहुत कम होता है, पर गहराई कुएँ जितनी ही होती है। साथ ही कुईं रेजाणीपानी को समेटती है, जो खारे पातालपानी से अलग मीठा रहता है।
भाग 3 · वितान

आलो-आँधारि (बेबी हालदार)

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताएँ और उन्हें होने वाली समस्याएँ बताइए।

उत्तर: बेबी के जीवन से पता चलता है कि घरेलू नौकरानी को कम वेतन में बच्चों को पालना और घर का किराया देना होता है। उसे रहने के लिए सस्ता, गंदा और असुविधाजनक घर लेना पड़ता है, जैसे बाहर शौच के लिए जाना और सुअरों का डर। आस-पास के लोग उसके निजी जीवन के बारे में तरह-तरह की बातें करते हैं। उसे सुबह से रात तक काम में लगे रहना पड़ता है और बच्चों की पढ़ाई भी चिंता का कारण बनी रहती है।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

“तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो”, जेठू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है?

उत्तर: यह कथन बताता है कि लेखक बनने के लिए बड़ी पढ़ाई या हैसियत की नहीं, बल्कि अनुभव और अभिव्यक्ति की ज़रूरत होती है। साधारण स्त्री भी अपने जीवन-अनुभव लिखकर रचनाकार बन सकती है। इस प्रोत्साहन ने बेबी को लिखने की प्रेरणा दी।
भाग 3 · वितान

भारतीय कलाएँ

प्र. 13 अंक⭐ संभावित

कला और भाषा के अंतर्संबंध पर आपकी क्या राय है?

उत्तर: जैसे हम भाषा में अपने भाव और विचार व्यक्त करते हैं, वैसे ही कलाएँ भी अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। चित्रकार रंगों में, गायक स्वरों में और नर्तक मुद्राओं में अपनी बात कहता है। जब भाषा नहीं थी, तब भी चित्रकारी थी। इसलिए कलाओं की अपनी भाषा होती है, जो भाषा की पूरक है।
प्र. 23 अंक⭐ संभावित

भारतीय संगीत की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: भारतीय संगीत सुर, ताल, राग और काल से जुड़ा है। अलग-अलग समय के राग अलग हैं, जैसे भैरव ब्रह्ममुहूर्त में और हिंडोल रात में। वीणा, जलतरंग, रबाब और बाँसुरी जैसे वाद्य रोज़मर्रा की चीज़ों से बनते हैं। संगीत लोक से भी जुड़ा था, जिसमें संस्कारगीत और ऋतुगीत हैं, जैसे मिर्ज़ापुर की कजरी और उत्तर प्रदेश का सोहर।
अतिरिक्त

लेखक / कवि परिचय (3 अंक)

लिखने का तरीका

परीक्षा में परिचय हमेशा तीन बिंदुओं पर पूछा जाता है: (1) दो रचनाएँ, (2) भावपक्ष-कलापक्ष या भाषा-शैली, (3) साहित्य में स्थान। जन्म-मृत्यु की तारीख़ भूमिका में लिख दें।

प्रेमचंद 📌 2022 में पूछा📌 2023 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: मूल नाम धनपत राय; जन्म 1880, लमही (उ.प्र.); मृत्यु 1936। रचनाएँ: गोदान, गबन, निर्मला, रंगभूमि (उपन्यास); मानसरोवर (कहानी संग्रह)।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: हिंदुस्तानी (हिंदी-उर्दू मिश्रित) भाषा, मुहावरों और लोकोक्तियों का सटीक प्रयोग, यथार्थ और आदर्श का मेल।

साहित्य में स्थान: कथा-साहित्य के शिखर पुरुष; कहानी-उपन्यास को कल्पना और रूमानियत से निकालकर यथार्थ की ज़मीन पर प्रतिष्ठित किया।

कृष्णा सोबती 📌 2024 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 18 फ़रवरी 1925, गुजरात (अब पाकिस्तान); मृत्यु 25 जनवरी 2019। रचनाएँ: ज़िंदगीनामा, दिलो-दानिश, मित्रो मरजानी, हम-हशमत, शब्दों के आलोक में।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: संस्कृतनिष्ठ तत्समता, उर्दू का बाँकपन और पंजाबी की ज़िंदादिली का मेल; संयमित और साफ़-सुथरी रचनाशीलता।

साहित्य में स्थान: हिंदी कथा साहित्य में विशिष्ट स्थान; मित्रो, शाहनी, हशमत जैसे यादगार चरित्र।

सत्यजित राय 📌 2023 में पूछा📌 2026 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1921, कोलकाता; मृत्यु 1992। फ़िल्में: पथेर पांचाली, अपराजितो, अपू का संसार, शतरंज के खिलाड़ी; रचनाएँ: प्रो. शंकु के कारनामे, सोने का किला, बादशाही अँगूठी।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा: सहज, तत्सम-तद्भव-क्षेत्रीय सभी शब्दों का स्वाभाविक मेल; शैली: संस्मरणात्मक और बेबाक।

साहित्य में स्थान: भारतीय सिनेमा को कलात्मक ऊँचाई देने वाले फ़िल्मकार; ऑस्कर और भारतरत्न सहित कई सम्मान।

बालमुकुंद गुप्त 📌 2025 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1865, गुड़ियानी (रोहतक, हरियाणा); मृत्यु 1907। रचनाएँ: शिवशंभु के चिट्ठे, चिट्ठे और खत, खेल तमाशा।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: खड़ी बोली, व्यंग्य-विनोद का पुट, निर्भीकता; शब्दों के अद्भुत पारखी (अनस्थिरता शब्द पर महावीर प्रसाद द्विवेदी से बहस)।

साहित्य में स्थान: भारतेंदु-युग और द्विवेदी-युग के बीच की कड़ी; राष्ट्रीय नवजागरण के सक्रिय पत्रकार।

शेखर जोशी 📌 2024 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1932, अल्मोड़ा; मृत्यु 2022। रचनाएँ: कोसी का घटवार, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, एक पेड़ की याद।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: निहायत सहज और आडंबरहीन भाषा, सामाजिक यथार्थ के बारीक नुक्तों की पकड़।

साहित्य में स्थान: नई कहानी आंदोलन के प्रगतिशील पक्ष के प्रतिनिधि; मेहनतकश और सुविधाहीन तबके की कहानियाँ।

मन्नू भंडारी 📌 2022 में पूछा📌 2026 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1931, भानपुरा (म.प्र.); मृत्यु 2021। रचनाएँ: एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, आपका बंटी, महाभोज, स्वामी; पटकथाएँ: रजनी, निर्मला।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: आत्मीय अंदाज़, आक्रोश, व्यंग्य और संवेदना का मनोवैज्ञानिक आधार, सहज बोलचाल।

साहित्य में स्थान: नई कहानी आंदोलन की प्रमुख लेखिका; हिंदी अकादमी दिल्ली का शिखर सम्मान।

कृश्नचंदर (कृष्ण चंदर) 📌 2025 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1914, वज़ीराबाद (पंजाब); मृत्यु 1977। रचनाएँ: एक गधे की आत्मकथा, शिकस्त, ग़द्दार, अन्नदाता, पेशावर एक्सप्रेस।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: व्यंग्य, करुणा और यथार्थ का मेल; उर्दू के कथाकार होने के कारण भाषा में रवानी।

साहित्य में स्थान: प्रेमचंद के बाद कहानी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले कथाकार; प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े।

जवाहरलाल नेहरू ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1889, इलाहाबाद; मृत्यु 1964। रचनाएँ: मेरी कहानी, विश्व इतिहास की झलक, हिंदुस्तान की कहानी, पिता के पत्र पुत्री के नाम।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: सरल, प्रवाहमयी, प्रभावशाली; विचारों और भावों की स्पष्ट अभिव्यक्ति।

साहित्य में स्थान: स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री; राजनेता के साथ उच्च कोटि के लेखक।

कबीर 📌 2022 में पूछा📌 2026 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म सन् 1398, लहरतारा (वाराणसी के पास)। मृत्यु 1518, मगहर। रचनाएँ: बीजक (साखी, सबद, रमैनी)।

भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: निर्गुण भक्ति, एक ईश्वर, जाति-धर्म के भेद और कर्मकांड का विरोध, प्रेम और समानता का समर्थन। कलापक्ष: सधुक्कड़ी भाषा, साखी-सबद-रमैनी शैली, उलटबाँसियाँ, सरल प्रतीक।

साहित्य में स्थान: निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के प्रतिनिधि कवि। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें “वाणी का डिक्टेटर” कहा।

मीराबाई 📌 2023 में पूछा📌 2024 में पूछा📌 2025 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म सन् 1498, कुड़की गाँव (मारवाड़); मृत्यु 1546। रचनाएँ: मीरा पदावली, नरसीजी-रो-माहेरो।

भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: कृष्ण के प्रति माधुर्य भाव की भक्ति, विरह की वेदना और मिलन का उल्लास। कलापक्ष: राजस्थानी भाषा में ब्रज का प्रभाव, मुक्तक गेय पद, सरलता और संगीतात्मकता।

साहित्य में स्थान: सगुण धारा की महत्वपूर्ण कवयित्री। लोकलाज और कुल की मर्यादा के विरोध के कारण स्त्री-मुक्ति की आवाज़ भी बनीं।

भवानी प्रसाद मिश्र ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1913, टिगरिया (होशंगाबाद, म.प्र.); मृत्यु 1985। रचनाएँ: सतपुड़ा के जंगल, गीतफ़रोश, चकित है दुख, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाव-कला: सहज लय की कविता, बोलचाल के गद्यात्मक वाक्य-विन्यास को कविता में ढालना, गांधीवादी विचारधारा।

साहित्य में स्थान: “कविता का गांधी” कहे जाते हैं; साहित्य अकादमी और पद्मश्री से सम्मानित।

त्रिलोचन 📌 2023 में पूछा📌 2024 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: मूल नाम वासुदेव सिंह; जन्म 1917, चिरानी पट्टी, सुल्तानपुर (उ.प्र.); मृत्यु 2007। रचनाएँ: धरती, गुलाब और बुलबुल, दिगंत, ताप के ताए हुए दिन, शब्द।

भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: जीवन में निहित मंद लय, गाँव की ज़मीन से जुड़ाव, श्रमिकों के जीवन का यथार्थ। कलापक्ष: छायावादी रूमानियत से मुक्त भाषा, बोलचाल की चुटीली-नाटकीय भाषा, हिंदी में सॉनेट को स्थापित किया।

साहित्य में स्थान: प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि; साहित्य अकादमी सहित कई सम्मान।

दुष्यंत कुमार 📌 2025 में पूछा📌 2026 में पूछा

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1933, राजपुर नवादा (उ.प्र.); मृत्यु 1975। रचनाएँ: सूर्य का स्वागत, आवाज़ों के घेरे, साये में धूप, एक कंठ विषपायी (गीतिनाट्य)।

भाषा-शैली / भाव-कला: भावपक्ष: व्यवस्था के प्रति आक्रोश, बदलाव की तलाश, आम आदमी की पीड़ा। कलापक्ष: उर्दू-हिंदी मिश्रित सरल भाषा, ग़ज़ल विधा का हिंदी में प्रयोग।

साहित्य में स्थान: हिंदी ग़ज़ल को प्रतिष्ठित करने का श्रेय। उनके कई शेर लोकोक्तियों की तरह दोहराए जाते हैं।

अक्कमहादेवी ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 12वीं सदी, उडुतरी (शिवमोगा, कर्नाटक)। रचनाएँ: हिंदी में “वचन सौरभ”; अंग्रेज़ी में “स्पीकिंग ऑफ़ शिवा” (ए.के. रामानुजन)।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाव: वीरशैव आंदोलन की कवयित्री; चन्नमल्लिकार्जुन देव (शिव) की भक्ति, लोकलाज और भौतिक बंधनों का त्याग।

साहित्य में स्थान: स्त्री-मुक्ति और क्रांतिकारी चेतना की पहली सृजनात्मक आवाज़; बसवन्ना और अल्लामा प्रभु की समकालीन।

पाश ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: मूल नाम अवतार सिंह संधू; जन्म 1950, तलवंडी सलेम (जालंधर, पंजाब); मृत्यु 1988। रचनाएँ: लौह कथा, उड़ दे बाजां मगर, साडे समियां बिच (पंजाबी); बीच का रास्ता नहीं होता (हिंदी अनुवाद)।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाव-कला: विद्रोही कविता का नया सौंदर्य, तीखा पर सृजनात्मक तेवर, लोक संस्कृति का गहरा बोध।

साहित्य में स्थान: समकालीन पंजाबी साहित्य के महत्वपूर्ण कवि; खालिस्तानियों द्वारा मारे गए।

निर्मला पुतुल ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1972, दुमका (झारखंड)। रचनाएँ: नगाड़े की तरह बजते शब्द, अपने घर की तलाश में।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाव-कला: आदिवासी समाज की विसंगतियाँ, संथाली समाज के सकारात्मक-नकारात्मक पहलू, सरल और स्पष्ट भाषा।

साहित्य में स्थान: आदिवासी जीवन की अनछुई पहलुओं को सामने लाने वाली कवयित्री।

कुमार गंधर्व ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1924, सुलेभावि, बेलगाँव (कर्नाटक); मृत्यु 1992। मूल नाम शिवपुत्र सिद्धरामैया कोमकली; 10 वर्ष की उम्र में पहली मंचीय प्रस्तुति।

भाषा-शैली / भाव-कला: विशेषता: मालवा की लोकधुनों और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सुंदर सामंजस्य; कबीर के पदों का अद्भुत गायन।

साहित्य में स्थान: कालिदास सम्मान और पद्मविभूषण से सम्मानित।

अनुपम मिश्र ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म 1948, वर्धा (महाराष्ट्र); मृत्यु 2016। रचनाएँ: आज भी खरे हैं तालाब, राजस्थान की रजत बूँदें।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: सरल, प्रवाहमयी, लोक-शब्दों से भरपूर; शोधपरक शैली।

साहित्य में स्थान: पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में लोकप्रिय; 1977 से गांधी शांति प्रतिष्ठान के पर्यावरण कक्ष से संबद्ध।

बेबी हालदार ⭐ संभावित

जीवन परिचय व रचनाएँ: जन्म सन् 1974 (अनुमानित), जम्मू-कश्मीर। रचना: आलो-आँधारि (बांग्ला में लिखी, हिंदी में अनूदित)।

भाषा-शैली / भाव-कला: भाषा-शैली: सहज आत्मकथात्मक, बिना बनावट के जीवन-संघर्ष की ईमानदार अभिव्यक्ति।

साहित्य में स्थान: घरेलू नौकरानी के रूप में कार्यरत रहते हुए लेखिका बनीं; उनकी आत्मकथा बहुत चर्चित रही।

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